Wednesday, 18 November 2020

ज़िक्र मेरा

अपने प्रिय मित्र गणों मेंं शामिल मुझे किया था क्या?
दूर हुए अभी कुछ ही दिन बीते थे,ज़िक्र मेरा किसी से किया था क्या?
जब दिन-भर के व्यस्त जीवन से कुछ क्षण आराम के मिले थे,उन पलों में कोने में बैठ कर याद मुझे किया था क्या?
यूँ देर रात तक जाग-जाग कर विलोचन से नेत्रनीर को अलविदा किया था क्या?
खुद को व्यस्त दर्शाते हुए दिन तो कट ही जाता है,
पर अति कष्टदायी होती है रात, अकेले सन्नाटे में घड़ी कि सुई टक-टक करती हुई पल- पल का एहसास दिलाती है! 
डायरी के कुछ पन्नों को नाम मेरे किया था क्या?
कभी फिर मुस्करा कर नाम मेरा लिया था क्या?
मित्रों को कहा था कि ,अब वो साथ नहीं तो दुख बहुत है
साथ तुम्हारे न होने कि वजह बता कर,एहसास मेरा किया था क्या!
अपने प्रिय मित्र गणों में शामिल मुझे किया था क्या?
यूँ हि किसी बहाने से जिक्र मेरा किया था क्या?
-
प्रभा अधिकारी 


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